अनुवादन
हाल ही में अनुवादक चंचलिका शर्मा जी ने एक रील में #रुपा #विश्वास जी द्वारा लिखित #बांग्ला #कविता #माँ को सुना एवम् पढ़ा। मूल कविता चंचलिका शर्मा जी को कविता अच्छी लगी। प्रभावित होकर उन्होंने तुरंत उसका हिंदी अनुवाद करके पाठकों के समक्ष रखा है। आप सभी मित्रगणों समेत ख़ासकर कलमकारों से अनुवादिका की उम्मीद है कि प्रोत्साहन के दो शब्द लिखें। एक बात और कि अनुवादिका के लिए अनुवाद से आशय शाब्दिक अनुवाद से नहीं अपितु उसके भाव के अनुसार अनुवाद करना है ताकि अनुवाद किया गया अंश अर्थ के दृष्टिकोण से सटीक लगे। कृपया बांग्ला कविता को ज़ूम करके पढ़ें। " #माँ " " माँ " का अर्थ है यत्नपूर्वक स्नेह की छाया में उम्र का बढ़ना... ऑंचल में छुपाकर जीवन नौका को पार लगाना..... " माँ " का अर्थ है सब दु:ख, तकलीफ़ों को, मन के अंदर छुपाना... मुस्कुराते हुए अपना सब कुछ है दूसरों पर लुटाना... गुस्सा, अभिमान या कष्ट होने पर " माँ " को है डांटना... दिन के ख़त्म होते ही " माँ " की गोदी में आकर सर छुपाना.... क्षमा के समंदर का माँ के दिल म...