बांग्ला से हिन्दी
बांग्ला संग्रहित कविता 'पेंशन' जो कि सभी पेंशनरों को उत्सर्गित किया गया है। पढ़कर अनुवाद करने का लोभ संवरण न कर सकी। आप सभी पढ़कर देखें। वैसे मैं भी केन्द्र सरकार के ई पी एफ ओ विभाग से सेवानिवृत्त, पेंशनर हूँ।
পেনশন
*যখন তোমার চুল রুপোর মতো
ঝলমল করতে শুরু করে,*
*যখন তোমার হাঁটুতে 'কট-কট' এর
মিষ্টি শব্দ প্রতিধ্বনিত হতে থাকে,*
*আর চশমা ছাড়া তুমি দুনিয়াটা
পরিষ্কারভাবে দেখতে পাও না—*
*তখন কর্মজীবীর প্রিয়তমা বলে—*
*"এখন তুমি অবসর নিচ্ছ,*
*কিন্তু আমি তোমার নায়িকা...*
*যে তোমাকে কখনো ছেড়ে যাবে না..."*
*সেই নায়িকার নাম হলো—*
*পেনশন!*
*ওয়াও, ওয়াও...*
*এ তো এমন এক বিশ্বস্ত প্রেমিকা,*
*যে প্রতি মাসে এসে বলে—*
*"প্রিয়, আমি এসে গেছি,*
*এখন থেকে পুরো মাস তোমার সাথেই থাকব!"*
*সে মেজাজ দেখায় না,*
*কখনো দেখা করার তারিখ ভুল করে না,*
*কখনো সম্পর্ক ভাঙে না,*
*কখনো তোমার মন খারাপ করে না।*
*এ এমন এক সরল, সুন্দর, আর সংস্কৃতিবান নায়িকা,*
*তাকে দেখে, হৃদয় বলে—*
*"আমি তোমাকে ভালোবাসব... সারাজীবন!"*
*যৌবনের চাকরি*
*হলো প্রথম দর্শনের প্রেমের মতো,*
*কিন্তু পেনশন*
*হলো সারাজীবনের মধুচন্দ্রিমার মতো*
*মিষ্টি, শান্ত, স্থির এবং সহায়ক।*
*আর যখন সন্ধ্যায়*
*আমরা চা-নাস্তা নিয়ে বসি,*
*তখন পেনশনের সেই প্রিয়তমা*
*তোমার হাত ধরে বলে—*
*"ভয় পেয়ো না নায়ক...*
*আমি এখানেই আছি, পুরো সিনেমা জুড়ে তোমার সাথে।"*
*শেষ পর্যন্ত, সবকিছুর মানে বোঝা যায়—*
*বেতন হলো এক অস্থায়ী প্রেমিকা,*
*কিন্তু পেনশন*
*হলো জীবনের আসল নায়িকা,*
*যে আমাদের একেবারে শেষ দৃশ্য পর্যন্ত সঙ্গ দেবে...*
*এবং সিনেমাটিকে একটি সুখী সমাপ্তি দেবে।*
*প্রতি বছর নভেম্বরে শুধু প্রমাণ করতে হয় যে তোমার হৃদয় এখনও এই প্রিয়তমার জন্য স্পন্দিত হয়।*
* সংগৃহীত ও সকল পেনশনভোগীদের জন্য উৎসর্গীকৃত।*
पेंशन
जब तुम्हारे आंके बांके बाल
चांदी की तरह चमकने लगेंगे
जब तुम्हारे घुटनों से " कट कट "
करती मीठी आवाज़ प्रतिध्वनित होने लगेंगी
और जब चश्मे के बिना पूरी दुनिया
धुंधली - धुंधली दिखाई देने लगेंगी ,
तब कर्म जीवी की प्रियतमा बोलेगी...
" अभी तुम निवृत्त हो रहे हो सेवा से
लेकिन मैं तुम्हारी वो नायिका हूँ
जो तुम्हें छोड़कर कभी नहीं जायेगी."
उस नायिका का नाम है पेंशन...
वाह , वाह ...
यह तो एक ऐसी विश्वस्त नायिका है,
हर महीने आकर कहती है...
" प्रिय मैं आ गयी,
अभी से पूरे माह तुम्हारे साथ रहूँगी!"
वह कभी तेवर नहीं दिखाती,
कभी मिलने की तारीख़ नहीं भूलती
कभी रिश्ता भी नहीं तोड़ती
कभी मन भी खराब नहीं करती
यह इतनी सरल, सुंदर, सुसंस्कारी नायिका है,
जिसे देखकर दिल कहता है....
" मैं तुम्हें प्यार करता रहूँगा....आजीवन "
यौवन काल में नौकरी ...
पहली नज़र में प्रेम की तरह होती है,
मगर पेंशन ....
पूरे जीवन काल की ,
" मधुचंद्रिमा " की तरह ,
मिठास लिए, शांत, स्थिर एवम् सहायक.....
और ..... जब हम शाम को
चाय , नाश्ता लेकर बैठते हैं,
तब पेंशन वाली वही प्रियतमा
तुम्हारा हाथ थामे कहती है....
" डरना मत नायक ...
मैं यहीं हूँ, पूरे चित्रपट में समाकर ,
तुम्हारे साथ "
अंततः सब कुछ का अर्थ समझ आता है....
वेतन का अर्थ होता है एक अस्थायी
प्रेमिका की तरह,
मगर पेंशन,
होती है जीवन की असली नायिका,
जो साथ देगी अंतिम दृश्य तक..
हर साल , नवम्बर महीने में
बस प्रमाण करना पड़ता है कि
तुम्हारा दिल अभी भी स्पंदन शील है
तुम्हारी प्रियतमा के लिए....
अनुवादिका ---चंचलिका





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